Class Discipline Essay In Hindi

अनुशासन 2 शब्दों के मेल से बना है- अनुशासन अर्थात शासन के पीछे चलना । देश, समाज, संस्था आदि के नियमों के अनुसार चलना अनुशासन कहलाता है । अनुशासन के बिना राष्ट्र बिना चप्पू की नौका के समान डगमगाने लगता है ।

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अनुशासन का होना जरुरी है । क्या घर, क्या स्कूल, क्या सामाजिक जीवन अथवा सेवा में । माता पिता यदि अपने बच्चे को घर पर ही अनुशासन में रहने की शिक्षा दें तो वह समाज में भी शीघ्र अपना स्थान बना सकता है । जिस घर में अनुशासन न हो, वंहा कभी शांति नहीं हो सकती ।

इसी प्रकार स्कूलों तथा कॉलेजों में अनुशासन अनिवार्य है । अध्यापकों की आज्ञानुसार पढ़ना ही तो अनुशासन है । जिस विद्यालय में अनुशासन का अभाव हो उसके छात्र कभी चरित्रवान नहीं हो सकते । प्रत्येक कार्यालय में छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक सभी को अनुशासन में रहकर काम करना पड़ता है ।

सेना में तो अनुशासन का और भी महत्व है । सैनिक अनुशासन को बहुत अधिक महत्व देता है । तभी तो लड़ाई के मैदान में या भरी बारिश, बर्फ़बारी में भी हमारे सेना के जवान आगे बढ़ते रहते हैं । तभी देश विजयी होता है । यह सब अनुशासन का प्रताप है । कई मुर्ख अनुशासन को दासता कहकर इसका विरोध करते हैं ।

पुराने समय में भी राजा महाराजा भी अनुशासन का पालन कठोरता से करते थे । जानवर भी अनुशासन में रहना पसंद करते हैं । अतः हम सभी को हमेशा अनुशासन का पालन करना चाहिए ।


किसी भी व्यक्ति के लिए विद्यार्थी जीवन अत्यंत महत्वपूर्ण है। छात्र जीवन में ही सीखी गई बातें आगे के जीवन में काम आता है। अगर छात्र विद्यार्थी जीवन में अपने समय का सदुपयोग करते हैं और ज्यादा से ज्यादा शिक्षा ग्रहण करते हैं तो आगे के भविष्य में उन्हें बहुत फायदा पहुंचता है। छात्र जीवन में अनुशासन का अत्यंत महत्व है क्योंकि अगर छात्रों में अनुशासन का अभाव होगा तो वह उपयोगी शिक्षा ग्रहण करने की जगह गलत चीजों में अपना समय नष्ट करेंगे। ज्यादातर छात्र कम उम्र के होते हैं उन्हें सही या गलत की बहुत अच्छे से परख नहीं होती है, अगर उनमें अनुशासन की कमी होगी तो वह आसानी से गलत रास्ते पर जा सकते हैं और एक बार गलत रास्ते पर जाने के बाद फिर से वापस सही रास्ते पर आने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

माता-पिता और शिक्षकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विद्यार्थी अनुशासित जीवन जी रहा है और अगर विद्यार्थी अनुशासन बनाए रखने में कष्ट महसूस कर रहा है तो इसका कारण समझना चाहिए और जिस भी कारणों से बच्चों को अनुशासन का पालन करने में कठिनाइयां आ रही हो तो उस कारण को दूर करने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि छात्र जीवन ही आदमी के आगे के जीवन का आधार है। जब तक छात्र कुछ सीख रहा है उसे सीखने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए। ऐसा देखा गया है कि बहुत सारे विद्यार्थी सिर्फ परीक्षा के समय ही अच्छी तरह पढ़ाई करते हैं और बाकी समय खेलते-कूदते रहते है, उन्हें यह नहीं पता होता है कि विद्यार्थी जीवन का समय कितनी जल्दी बीत जाता है और उनका यह कीमती समय नष्ट हो जाता है इसलिए विद्यार्थी को अनुशासन में रहना चाहिए।

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